Sunday, May 6, 2012

मनमानी का इलाज

मनमानी का इलाज

गरीबों के मुफ्त इलाज को लेकर निजी अस्पताल लंबे समय से आनाकानी करते रहे हैं। उन्हें बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर जमीन उपलब्ध कराई गई थी, इस शर्त पर कि वे अपने यहां कम से कम पचीस फीसद बिस्तर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए आरक्षित रखेंगे। उनकी जांच, आॅपरेशन, दवा आदि के मद में कोई पैसा नहीं लेंगे। मगर केंद्र सरकार के बार-बार अधिसूचना जारी करने, दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद उन्होंने नियम और शर्तों का पालन करना जरूरी नहीं समझा। बल्कि पिछले साल कुछ निजी अस्पतालों ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष गुहार लगाई कि उनके यहां कैंसर, हृदय रोग के इलाज जैसी विशिष्ट सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इन रोगों का इलाज खासा खर्चीला है। ऐसे में गरीबों के लिए यानी पचीस फीसद मामलों में मुफ्त इलाज के प्रावधान से उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ेगा। तब सर्वोच्च न्यायालय ने फटकार लगाई थी कि उन्हें ये बातें सस्ती दर पर जमीन लेने से पहले सोचनी चाहिए थीं। कुछ अस्पतालों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में दलील दी थी कि जमीन आबंटन के समय गरीबों के मुफ्त इलाज की शर्त रखी ही नहीं गई थी। इस पर उच्च न्यायालय ने कहा है कि सस्ती दर पर भूखंड पाने वाला कोई भी अस्पताल इस तरह का कोई तर्क नहीं दे सकता। अदालत के इस आदेश से यह उम्मीद जगी है कि अब निजी अस्पतालों को सामाजिक जिम्मेदारी को पूरा करना ही होगा। पिछले हफ्ते संसद की लोकलेखा समिति ने सुझाव दिया था कि स्वास्थ्य मंत्रालय एक ऐसा निगरानी तंत्र विकसित करे, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के निशुल्क इलाज संबंधी नियम और शर्तों के पालन में निजी अस्पतालों की मनमानी पर कड़ाई से नजर रखी जा सके। संसदीय समितियों की कई सिफारिशें ठंडे बस्ते में डाल दी जाती   हैं। लेकिन अदालत के आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि सरकार इस सुझाव पर अमल करे।
निजी अस्पताल सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का फायदा उठाते हैं। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों, दवाओं, कुशल डॉक्टरों-नर्सों आदि के अभाव के चलते उनकी सेवाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर होता गया है। दूसरी ओर, निजी अस्पताल अपनी सेवाओं की मनचाही रकम वसूलते हैं। निजी स्कूलों को भी इस शर्त के साथ सस्ती दर पर जमीन उपलब्ध कराई गई थी कि वे अपने यहां पचीस फीसद सीटें आर्थिक रूप से कमजोर तबके के बच्चों के लिए आरक्षित रखेंगे। मगर वे टालमटोल करते रहे। आखिरकार इस प्रावधान को शिक्षा अधिकार कानून में रखना पड़ा। निजी स्कूलों के मालिक-प्रबंधक फिर भी आनाकानी करते रहे और इस प्रावधान को उन्होंने अदालत में चुनौती दी। मगर पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। साथ ही यह भी कहा कि निजी स्कूल गरीब बच्चों के लिए अलग से या अलग पाली में कक्षाएं नहीं लगा सकते। यह बात निजी अस्पतालों पर भी लागू होनी चाहिए, यानी सरकार को देखना होगा कि वे खैराती वार्ड जैसी कोई व्यवस्था न तलाश लें। चिकित्सा निरा व्यवसाय नहीं है। इससे मानवीय सरोकार हमेशा जुड़े रहे हैं। फिर निजी अस्पतालों से गरीबों के मुफ्त इलाज की अपेक्षा परोपकार के तौर पर नहीं की गई थी। उन्होंने रियायती दर पर जमीन पाने के लिए बाकायदा करार किया था। अगर वे इसका उल्लंघन करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई करने में सरकारों को संकोच नहीं करना चाहिए।


मां को अधिकार देने की पहल
हाल ही में योजना आयोग के दिए गए सुझाव को अगर वास्तविकता का जामा पहनाया जाता है, तो निस्संदेह भारतीय मां की परिस्थिति सामाजिक तौर पर सुदृढ़ होगी। एक लंबे समय से, समाज के संवेदनशील वर्ग द्वारा यह महसूस किया जा रहा था कि "भारतीय जननी" को कानूनी और सामाजिक तौर पर वह दर्जा हासिल नहीं हुआ, जोकि उसे मिलना चाहिए। इसी तथ्य को मद्देनजर रखते हुए मां को "फर्स्ट गार्जियन" (प्रथम अभिभावक) बनाने का प्रस्ताव योजना आयोग ने रखा है। अगर ऎसा हुआ, तो जन्म प्रमाण-पत्र से लेकर स्कूल कॉलेज के एडमिशन फॉर्म समेत सभी सरकारी दस्तावेजों में "मां" का नाम ही मुख्य अभिभावक के रूप में दर्ज होगा। यह विडम्बना नहीं तो क्या है कि मां जो नौ महीने संतान को अपने खून से सींचती है, उसकी प्रथम अभिभावक नहीं होती। कुछेक कानूनी प्रावधानों के चलते मां अपने बच्चे की "वैधानिक अभिभावक" कहलाने की अधिकारिणी नहीं है। "हिन्दू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट (1956)" की धारा 5-6 और "गार्जियन एण्ड वाड्र्स एक्ट (1980)" की धारा 19 को इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है। इन कानूनों में नाबालिग बेटे या बेटी के पिता को ही वास्तविक अधिकारी या "नेचुरल गार्जियन" माना गया है। हां, यह बात अलग है कि विशेष परिस्थितियों में मां को बच्चे का अभिभावक बनाया जाता है, परन्तु विशेष परिस्थितियों की सत्यता सिद्ध करने के लिए न्यायालय का आश्रय लेना पड़ता है।

विगत दशकों में भारतीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि एक आमूलचूल परिवर्तन के साथ खड़ी हुई दिखाई दे रही है, विशेष कर आर्थिक तौर पर महिलाओं के सुदृढ़ीकरण ने समाज में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। शनै: शनै: ऎसी महिलाओं की संख्या बढ़ रही है, जो विवाह के बंधन को न स्वीकारते हुए भी "मां" बनना चाहती हैं और इसके लिए वह कानूनन बच्चे गोद ले रही हैं और दूसरी ओर, सम्बन्ध विच्छेद की अवस्था में वो महिलाएं जो अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं, उनके लिए एक ऎसे आदमी के नाम का बार-बार जिक्र होना जिसके साथ अब वे नहीं रह रही हों, पीड़ादायक है। यह गौरतलब तथ्य यह है कि 17 फरवरी 1999 को उच्चतम न्यायालय ने अपने एक निर्णय माता-पिता दोनों को ही समान रूप से संतान का अधिकारी बताया था। अपने बच्चे की देखभाल में अपना सर्वस्व अर्पित करने वाली मां अपने बच्चे के स्कूल या कॉलेज के एडमिशन फार्म पर हस्ताक्षर नहीं कर सकती। इसी तरह के सवालों को लेकर "हिन्दू माइनरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट (1956)" की संवैधानिक वैधता को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की गई। ऎसा कोई सामाजिक, आर्थिक या वैज्ञानिक आधार नहीं है, जिसके कारण यह कहा जा सके कि महिला अपने बच्चे की अभिभावक बनने की अधिकारी नहीं है। अगर कोई ठोस तर्क नहीं है, तो क्यों एक मां को उसके अधिकार से वंचित किया जा रहा है?

विगत वर्षो में उच्चतम न्यायालय ने अपने निर्णयों में देह व्यापार में संलग्न महिलाओं व उनके बच्चों के पुनर्वास पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मानवीय आधार पर यह विचारणीय प्रश्न है कि क्या देह व्यापार से जुड़ी महिलाओं के बच्चों को स्वाभिमान से जीने का अधिकार नहीं है, जब भी ये बच्चे शिक्षा की ओर कदम बढ़ाकर आत्मनिर्भर होने का स्वप्न देखते हैं, तो उनकी मां स्कूल में एडमिशन के समय "पिता" के नाम के प्रश्न से भयभीत हो जाती है। हमें यह स्वीकारना ही होगा कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी क्यों न हों, मां अपने बच्चे की देखभाल पूर्ण समर्पण, त्याग और सक्षमता के साथ करती है, इसलिए एक स्त्री को जो दोयम दर्जे की स्थिति मिली हुई है, उसे योजना आयोग का यह प्रस्ताव पहले पायदान पर लाने की एक पहल है।

जिम्मेदार कौन
बगैर योजना के प्रशासन के नुमाइंदे कई बार ऎसी योजनाएं बनाते हंै, जिससे सरकार के साथ ही आमजन को भी खामियाजा भुगतना पड़ता है। करीब सात साल पहले शासन ने रतनजोत से बॉयो-डीजल उत्पादन की योजना बनाई थी, तब कई निजी कंपनियां भी मैदान में कूद पड़ीं। कंपनियों ने किसानों को ललचाते हुए दो का पौधा 10 रूपए में बेचा। शासकीय अमले द्वारा भी लाखों की संख्या में रतनजोत के पौधे रोपे गए। अमले द्वारा रोपे गए पौधे जहां उदासीनता के चलते सूख गए। वहीं किसानों ने बड़े जतन से पौधों का रख-रखाव किया, लेकिन जब पौधे बीजोत्पादन करने लगे तो प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए।

तीन साल में जब बीजोत्पादन हुआ, तो बॉयो-डीजल संयंत्र नहीं लगे। यहां तक कि योजना के तहत जिन निजी कंपनियों ने भी बीज खरीदने का दावा किया था, वे भी भाग गई। सरकार ने भी रतनजोत के बीज खरीदने की कोई व्यवस्था नहीं की। अधिकारियों ने यह कहकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली कि योजना ही बंद हो गई। यह ऎसा मामला है, जहां प्रशासनिक उदासीनता से न केवल किसानों की आस टूटी, बल्कि उनके जीवीकोपार्जन का एक अवसर भी हाथ से चला गया। सरकारी धन, जो अन्य विकास कार्यो में इस्तेमाल किया जा सकता था, वह भी बर्बाद हो गया।

प्रशासनिक विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए। ऎसे में किसान ठगा महसूस कर रहे हैं। मंदसौर में बॉयो-डीजल प्लांट स्थापित करने की योजना एक बहुआयामी योजना थी, जिससे लाभ सरकार, जनता, पर्यावरण सबको होना था, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। ऎसे में नई योजनाओं के क्रियान्वयन में किसानों की भागीदारी को फिर से प्राप्त करना एक मुश्किल काम हो जाता है, क्योंकि विश्वास एक नाजुक संवेदना होती है, जो किसान व सरकार के आपसी सहज संबंध को कायम रखने में बुनियाद का काम करती है। इसलिए प्रशासन को सचेत होकर नियोजन पर ध्यान देना चाहिए।
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इंसाफ की ओर

इंसाफ की ओर
अगर मानवाधिकारों का हनन होता हो, तो कोई भी व्यवस्था न लोकतांत्रिक कही जा सकती है न न्यायसंगत। इसलिए उच्चतम न्यायालय ने उचित ही समय-समय पर फर्जी मुठभेड़ की घटनाओं को गंभीरता से लिया है। पथरीबल मामले में उसका फैसला इसी सिलसिले की ताजा कड़ी है। इस फैसले ने आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के घेरे में लाने का रास्ता साफ कर दिया है। बारह साल पहले अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की भारत यात्रा के समय आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के छत्तीसिहंपुरा में छत्तीस सिखों की हत्या कर दी थी। चार दिन बाद इस जनसंहार के आरोप में सेना ने पांच लोगों को मार गिराया और उनके आतंकवादी होने का दावा किया। मगर सेना के इस दावे पर शुरू से सवाल उठते रहे। मारे गए लोगों की शिनाख्त के लिए राज्य में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। आखिर जांच से यह तथ्य सामने आया कि सैनिक अधिकारियों के हाथों मारे गए पांचों व्यक्ति साधारण गांववासी थे। परिजनों ने उनके लापता होने की एफआइआर दर्ज कराई थी। जब मुठभेड़ में उनके मारे जाने की खबर आई तो वे स्तब्ध रह गए। उनकी मांग पर शवों को कब्र से निकाल कर डीएनए जांच कराई गई। यह साबित हो गया कि ये शव उन्हीं लोगों के थे जिनके लापता होने की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। फिर इस मामले को 2003 में सीबीआइ को सौंप दिया गया। इसके तीन साल बाद विशेष अदालत में दायर किए गए आरोप पत्र में उसने साफ कहा है कि पचीस मार्च 2000 को पथरीबल में हुई घटना मुठभेड़ नहीं थी। पांचों व्यक्ति अनंतनाग और उसके आसपास से पकड़ कर लाए गए थे। उन्हें एक निर्जन स्थान पर ले जाकर सुनियोजित तरीके से मार डाला गया।
इसी तरह का एक वाकया असम के कामरूप जिले का भी है। इन दोनों मामलों में चूंकि सेना के अधिकारी आरोपी हैं, इसलिए मुकदमे की कार्यवाही बरसों से रुकी रही है। इस गतिरोध का एक आयाम सुरक्षा बल विशेषाधिकार अधिनियम से भी जुड़ा रहा है। इस अधिनियम के तहत किसी आपराधिक मामले में सैनिकों के खिलाफ मुकदमा चलाने से पहले केंद्र सरकार की इजाजत अनिवार्य है। इस प्रावधान पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई प्रश्न नहीं उठाया है, पर यह भी साफ कर दिया है कि आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा। उसने सैन्य प्राधिकरण से कहा है कि वह खुद तय कर ले कि कोर्ट मार्शल की कार्यवाही हो या सामान्य अदालत में मुकदमा चले। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि अगर सैन्य प्रतिष्ठान दो महीने में इस बारे में कोई निर्णय नहीं कर पाता है तो वह मुकदमा चलाने की अनुमति पाने के लिए केंद्र सरकार से फरियाद करे। सीबीआई के अनुरोध पर सरकार को तीन महीने में निर्णय करना होगा। इस तरह एक लंबे कानूनी झगड़े का अंत हो गया है। पर पथरीबल की घटना के बारह साल बाद मामला सिर्फ इस मुकाम पर पहुंचा है कि न्यायिक प्रकिया शुरू करने की अड़चनें खत्म होती दिख रही हैं। जब-जब सुरक्षा बल विशेषाधिकार कानून के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आर्इं, सेना की ओर से यह दलील दी जाती रही कि आतंकवाद से निपटने के लिए यह कानून जरूरी है। पर इसमें सुरक्षा बलों के लिए विशेष प्रावधान कार्रवाई के दौरान होने वाली हिंसा को ध्यान में रख कर किए गए थे। जब सीबीआई जांच से फर्जी मुठभेड़ के आरोप की पुष्टि हुई, तो सेना ने कोर्ट मार्शल की कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की? वैसा नहीं हुआ, तो केंद्र सरकार चुप क्यों बैठी रही? यह विचित्र है कि इतने अहम मामले में रक्षा मंत्रालय और सीबीआइ का रुख अलग- अलगरहा है।

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नियम सबके लिए एक हो

नियम सबके लिए एक हो
महाकाल लोगों की आस्था का प्रतीक। दूर-दूर से लोग इस ज्योतिर्लिग के दर्शन करने आते हैं। हर कोई चाहता है कि गर्भगृह में जाकर बाबा के दर्शन और उनका अभिषेक करे। गर्मियों की छुट्टी में दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। भीड़ के साथ बढ़ रही हैं महाकाल प्रशासन की परेशानियां। मंगलवार को ही बाबा के दर्शन ढंग से नहीं होने को लेकर श्रद्धालुओं ने भारी हंगामा कर दिया। उसके बाद निर्णय लिया गया कि सुबह 11 से शाम 5 बजे तक गर्भगृह में प्रवेश बंद रखा जाएगा। गलती किसी की भी हो, लेकिन आम श्रद्धालु ही इससे सबसे ज्यादा परेशान होता है।

महाकाल के दर्शन के लिए देश ही नहीं विदेश से भी श्रद्धालु आते हैं। जब वे इतने पास होते हुए भी गर्भगृह में नहीं पहुंच पाते तो निराशा स्वाभाविक है। हंगामे के बाद हरियाणा से आए एक श्रद्धालु का कहना था कि वह अब कभी महाकाल नहीं आएंगे। ये मात्र उज्ौन नहीं बल्कि प्रदेश की प्रतिष्ठा का प्रश्A है। आए दिन होने वाले हंगामे के लिए किसी एक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए महाकाल प्रशासन, पंडे-पुजारी और श्रद्धालु सभी कुछ हद तक जिम्मेदार हैं। सबसे अधिक समस्या पैदा करते हैं वीआईपी। लगभग रोजाना महाकाल में कोई-न-कोई वीआईपी दर्शन के लिए आता है।

वीआईपी की व्यवस्था करने में ही अव्यवस्था फैलती है। घंटों लाइन में खड़े होकर गर्भगृह के पास पहुंचने वालों को जब पता चलता है कि कोई वीआईपी दर्शन कर रहा है, इसलिए उन्हें रोका गया है तो उनके सब्र का बांध टूट जाता है। वीआईपी के लिए वैसे तो कहीं कोई नियम मायने नहीं रखते, लेकिन भगवान के दरबार में तो सभी को एक माना जाना चाहिए। अलबत्ता जिनकी सुरक्षा को खतरा है, उन्हें इससे छूट दी जा सकती है। इसकी एक कड़ी पंडे-पुजारी भी हैं। चंद रूपयों के लालच में यजमानों को गर्भगृह में ले जाकर अभिषेक करवाने के लिए वे नियमों का ध्यान नहीं रखते। इधर गर्भगृह में भीड़ बढ़ी और उधर प्रवेश बंद हुआ। कई बार श्रद्धालु भी मनमानी पर उतारू हो जाते हैं।

वो चाहते हैं कि सबसे पहले उन्हें ही दर्शन हों। इसके कारण भी गड़बड़ी होती है और सुरक्षा गार्डो से तनातनी होती है। वीआईपी व्यवस्था में सुधार, पंडे-पुजारियों पर लगाम व श्रद्धालुओं को सुविधा देकर अप्रिय स्थिति से बचा जा सकता है। नियम कड़े बनाए जाएं और उसका पालन नहीं करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो तभी व्यवस्था में सुधार हो सकता है। अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग नियम बनाना ठीक नहीं है। नियम सबके लिए एक होने चाहिए। कुछ खास त्योहारों जैसे शिवरात्रि, संक्रांति आदि पर गर्भगृह में प्रवेश बंद करना निश्चित ही उचित है, लेकिन आम दिनों में महाकाल प्रशासन को इससे बचना चाहिए।

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जिन्दगी से लंबी पीड़ा की कहानी

जिन्दगी से लंबी पीड़ा की कहानी
 

सूरतगढ़। चार बच्चों को छोड़ पति चल बसा। न सिर छिपाने के लिए स्थाई छत और न ही पेट भरने के लिए घर में दाने थे। उम्मीद थी कि फार्म में नौकरी लगकर बच्चों को संभाल लूंगी लेकिन फार्म प्रशासन ने भी सुध नहीं ली। यह पीड़ा है मृतक सादूराम की पत्नी शकुंतला देवी की, जो अनुकम्पा नियुक्ति की बाट जोह रही है।

सादूराम फार्म मे दैनिक वेतन भोगी के रूप मे कार्यरत था। उसे न्यूनतम मजदूरी मिलती थी। उसने कर्ज लेकर आठ बच्चों में से चार पुत्रियों की शादी कर दी। 2008 में लम्बी बीमारी के बाद मृत्यु हो गई। ऎसे में दो पुत्रों व दो पुत्रियों के भरण-पोष्ाण तथा कर्ज उतारने की जिम्मेदारी शकुंतला देवी पर आ गई। उसने लोगों के घर बर्तन साफ कर बच्चों का पेट भरने का जतन किया लेकिन पार नहीं पड़ी। अंतत: पन्द्रह वर्षीय पुत्र किसनकुमार ने परिवार की जिम्मेदारी उठा ली और फार्म मे ठेकेदार के अधीन न्यूनतम मजदूरी पर लग गया। दो वर्ष तक न्यूनतम मजदूरी पर काम करने के बाद वह अन्य स्थान पर मजदूरी करने लगा। लगातार मजदूरी नहीं मिलने से परिवार का पोषण मुश्किल हो गया।

बच्चों का क्या करूं
- चार बच्चों की जिम्मेदारी का कैसे निर्वहन करूं। बेटियां शादी योग्य हो गई, लेकिन फार्म में नौकरी नहीं मिलने के कारण शादी करना मुश्किल हो गया है। बच्चे पढ़ नहीं पाए। इस कारण अच्छा कार्य नहीं मिल पाएगा। फार्म प्रशासन उदारता दिखाए तो बच्चों का भविष्य संवर जाए।

कुपोषण के हालात
- शकुंतला देवी के साथ रहने वाली दोनों पुत्री कुपोषण का शिकार हो रही हैं। घर मे भी रूखी-सूखी खाकर पेट भरा। शकुंतला देवी के अनुसार दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कैसे किया, यह वही जानती है।

भूखे मर रहे हैं लोग
- फार्म मे मृतक आश्रित की नौकरी नहीं मिलने से कई परिवार भूखों मर रहे हैं। फार्म प्रबंधन को सहानुभूति का रवैया अपनाकर इन्हें तुरन्त नियुक्ति देनी चाहिए।

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गरीबी का पैमाना

गरीबी का पैमाना
राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन के ताजा आंकड़ों से एक बार फिर यही साबित हुआ है कि देश की आधी से अधिक आबादी बदहाली में जी रही है। इस अध्ययन के मुताबिक जुलाई 2009 से जून 2010 के बीच साठ फीसद ग्रामीण रोजाना पैंतीस रुपए से कम पर गुजारा कर रहे थे। वहीं साठ फीसद शहरी जनसंख्या का औसत दैनिक खर्च छियासठ रुपए दर्ज किया गया। पर अगर साठ फीसद के बजाय नीचे की दस फीसद आबादी को लें तो हालत और खराब दिखेगी। सर्वेक्षण के समय ग्रामीण क्षेत्रों की सबसे नीचे की दस फीसद आबादी का प्रतिव्यक्ति दैनिक खर्च महज पंद्रह रुपए से कम था। शहरों में यह हिसाब बीस रुपए से नीचे ठहरता है। विभिन्न राज्यों के बीच भी आय या व्यय के लिहाज से काफी अंतर है। मसलन बिहार, छत्तीसगढ़ और ओड़िशा का प्रतिव्यक्ति उपभोक्ता खर्च केरल के मुकाबले आधे से भी कम है। शहरी और ग्रामीण भारत और विभिन्न राज्यों के प्रतिव्यक्ति दैनिक खर्च के आंकड़े देने के साथ ही इस सर्वेक्षण ने पूरे देश में गरीबी के बारे में भी एक अनुमान पेश किया है।
इस सर्वेक्षण के समय गरीबी रेखा ग्रामीण भारत के लिए करीब साढ़े बाईस रुपए और शहरों के लिए करीब साढ़े अट्ठाईस रुपए थी। इसके आधार पर गरीबी रेखा से नीचे की आबादी का आंकड़ा 35.46 करोड़ है। जबकि 2004-05 में यह आंकड़ा 40.72 करोड़ था। यानी इस दौरान गरीबों की तादाद में कोई सवा पांच करोड़ की कमी आई। 2004 में ही कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार बनी थी। वह इस आंकड़े को अपनी एक खास उपलब्धि के रूप में पेश कर सकती है। पर ध्यान रहे कि इस अध्ययन में गरीबी आकलन के लिए वही कसौटी लागू की गई जो योजना आयोग ने तय कर रखी है। आयोग ने उसी को मूल्य सूचकांक के हिसाब से संशोधित करके ग्रामीण क्षेत्रों के लिए छब्बीस रुपए और शहरी क्षेत्रों के लिए बत्तीस रुपए का मापदंड कुछ महीने पहले पेश किया था। इस पर देश में काफी तीखी प्रतिक्रिया हुई और सुप्रीम कोर्ट ने भी आपत्ति जताई। विडंबना यह है कि उच्चतम न्यायालय के एतराज और देश भर में उठे विवाद के बावजूद योजना आयोग गरीबी रेखा को बदलने को तैयार नहीं है। सरकार और आयोग की ओर से सिर्फ यह आश्वासन दिया गया है कि पीडीएस के लाभार्थियों की संख्या में कोई कमी नहीं की जाएगी।
गरीबी के अंतरराष्ट्रीय पैमाने के हिसाब से सवा डॉलर प्रतिदिन पाने वाले को गरीब और एक डॉलर वाले को अति गरीब की श्रेणी में रखा जाता है। यह विचित्र है कि हमारे नीतिकार भूमंडलीकरण की दुहाई देते नहीं थकते और कुछ सेवाओं और संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने का दम भरते हैं, पर जब गरीबी के आकलन की बात आती है तो वे अंतरराष्ट्रीय मापदंड को स्वीकार नहीं करते। अगर वैश्विक पैमाने को भारत में लागू किया जाए तो गरीबी का कैसा नक्शा सामने आएगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। सवाल है कि सरकार और आयोग गरीबी रेखा को बदलने को राजी क्यों नहीं हैं? इसलिए कि अगर गरीबी रेखा तर्कसंगत होगी तो गरीबों की तादाद काफी बढ़ी हुई दिखेगी। फिर गरीबी घटने का दावा आंकड़ों में भी नहीं किया जा सकेगा। यही नहीं, तब प्रचलित आर्थिक नीतियों की नाकामी दिखेगी और उन्हें बदलने का दबाव भी पैदा हो सकता है। सत्ता में बैठे हुए लोग और नीति-निर्माता ऐसा हरगिज नहीं चाहते। यह अलग बात है कि विकास को समावेशी बनाने का राग वे जब-तब अलापते रहते हैं।
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दवा की दरकार

दवा की दरकार
सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी चिकित्सीय सुविधाओं और मुफ्त वितरित की जाने वाली दवाओं के अभाव की शिकायतें आम हैं। इन्हें दूर करने के इरादे तो बहुत जताए जाते हैं, मगर कारगर कदम न उठाए जा पाने के कारण स्थिति जस की तस बनी रहती है। यही वजह है कि ज्यादातर लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करना और महंगे इलाज के लिए मजबूर होना पड़ता है। जबकि  राज्य सरकारें इस दिशा में संजीदगी दिखाएं तो सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा बहाल करना मुश्किल नहीं है। इस मामले में राजस्थान सरकार की पहल एक मिसाल कही जा सकती है। पिछले साल अक्तूबर में गहलोत सरकार ने राज्य के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर तीन सौ पचासी जीवनरक्षक दवाओं के मुफ्त वितरण का कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम की कामयाबी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस अवधि में सरकारी अस्पतालों में आने वालों की तादाद करीब चालीस फीसद बढ़ गई है। हर दिन करीब दो लाख लोगों को मुफ्त दवाएं वितरित की जाती हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को काफी मदद मिल रही है। जाहिर है, दूसरे सरकारी कार्यक्रमों की तरह इसे शुरू करके अपने हाल पर नहीं छोड़ दिया गया। इसे सफल बनाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। यों राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, जननी सुरक्षा, गरीबों के लिए स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाएं देश भर में चलाई जा रही हैं, मगर अपेक्षित नतीजे नहीं आ पा रहे तो उसके पीछे राज्य सरकारों में संजीदगी की कमी सबसे बड़ी वजह है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के करीब अस्सी करोड़ यानी कुल आबादी के दो तिहाई लोगों तक आवश्यक दवाओं की पहुंच सुनिश्चित नहीं हो पाती। इसके अलावा इलाज पर आने वाले खर्च की वजह से हर साल करीब दो करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे चले जाते हैं। क्योंकि बहुत सारे लोगों को सामान्य रूप से ठीक हो सकने वाले रोगों से निजात पाने के लिए भी जमीन-जायदाद बेचनी या गिरवी रखनी पड़ती है। तमाम स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बावजूद देश में तीन साल तक की उम्र के करीब छियालीस फीसद बच्चे और पंद्रह से उनचास साल के  बीच की करीब छत्तीस फीसद महिलाएं कुपोषण, रक्ताल्पता आदि की शिकार हैं। वहीं जीवनशैली और पर्यावरण में बदलाव के चलते पैदा होने वाली बीमारियों पर काबू पाना लगातार मुश्किल होता गया है। यह स्थिति सरकार के लिए चेतावनी होनी चाहिए। मगर समय-समय पर ऐसी रिपोर्टों के आते रहने के बावजूद हमारी सरकारों के कान पर जूं नहीं रेंगती। गरीबों को ध्यान में रख कर चलाई गई स्वास्थ्य योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं। अस्पतालों में मुफ्त वितरित की जाने वाली दवाओं की खरीद में धांधली होती है। बच्चों को जरूरी प्रतिरोधक टीके नहीं लगाए जा पाते। टीकाकरण के सारे कार्यक्रम लक्ष्य से पीछे चलते रहते हैं। जब पूर्वी उत्तर प्रदेश से दिमागी बुखार से लोगों के मरने या पश्चिम बंगाल के अस्पतालों से शिशुओं की मौत जैसी खबरें आती हैं, तब सरकारी चिकित्सा व्यवस्था की दुर्दशा जरूर चर्चा का विषय बनती है। फिर सब कुछ भुला दिया जाता है। जबकि इस तरह की बड़ी त्रासदी भी सरकारी अस्पतालों में व्याप्त संवेदनहीनता और उपेक्षा का नतीजा होती है। '
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Saturday, April 16, 2011

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Eyes On It (An Erotic Novelette) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 16, 2011 at 11:16 AM
 
Eyes On It (An Erotic Novelette)
Eyes On It (An Erotic Novelette) (Kindle Edition)
By Dylan English

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In the Garden of Disgrace (The Garden Series) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 16, 2011 at 11:11 AM
 
In the Garden of Disgrace (The Garden Series)
In the Garden of Disgrace (The Garden Series) (Kindle Edition)
By Cynthia Wicklund
   
   
A Model Week (The Sexcapades of Lanie Watson) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 16, 2011 at 11:07 AM
 
A Model Week (The Sexcapades of Lanie Watson)
A Model Week (The Sexcapades of Lanie Watson) (Kindle Edition)
By Sara York

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Eyes On It (An Erotic Novelette) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 16, 2011 at 8:46 AM
 
Eyes On It (An Erotic Novelette)
Eyes On It (An Erotic Novelette) (Kindle Edition)
By Dylan English

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Eyes On It (An Erotic Novelette) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 16, 2011 at 8:45 AM
 
Eyes On It (An Erotic Novelette)
Eyes On It (An Erotic Novelette) (Kindle Edition)
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Eyes On It (An Erotic Novelette) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 16, 2011 at 8:45 AM
 
Eyes On It (An Erotic Novelette)
Eyes On It (An Erotic Novelette) (Kindle Edition)
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Eyes On It (An Erotic Novelette) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 16, 2011 at 8:45 AM
 
Eyes On It (An Erotic Novelette)
Eyes On It (An Erotic Novelette) (Kindle Edition)
By Dylan English

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In the Garden of Disgrace (The Garden Series) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 16, 2011 at 4:01 AM
 
In the Garden of Disgrace (The Garden Series)
In the Garden of Disgrace (The Garden Series) (Kindle Edition)
By Cynthia Wicklund
   
   
A Model Week (The Sexcapades of Lanie Watson) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 16, 2011 at 2:11 AM
 
A Model Week (The Sexcapades of Lanie Watson)
A Model Week (The Sexcapades of Lanie Watson) (Kindle Edition)
By Sara York

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A Model Week (The Sexcapades of Lanie Watson) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 16, 2011 at 2:10 AM
 
A Model Week (The Sexcapades of Lanie Watson)
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By Sara York

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CybrGrrl (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 15, 2011 at 8:57 AM
 
CybrGrrl
CybrGrrl (Kindle Edition)
By Maxwell Cynn
   
   
CybrGrrl (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 15, 2011 at 8:57 AM
 
CybrGrrl
CybrGrrl (Kindle Edition)
By Maxwell Cynn
   
   
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April 15, 2011 at 8:57 AM
 
CybrGrrl
CybrGrrl (Kindle Edition)
By Maxwell Cynn
   
   
Three (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 15, 2011 at 5:18 AM
 
Three
Three (Kindle Edition)
By Opal Carew

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Three (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 15, 2011 at 5:17 AM
 
Three
Three (Kindle Edition)
By Opal Carew

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Three (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 15, 2011 at 5:17 AM
 
Three
Three (Kindle Edition)
By Opal Carew

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The Lab Partner (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 14, 2011 at 9:49 AM
 
The Lab Partner
The Lab Partner (Kindle Edition)
By Tameka Weller

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The Lab Partner (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 14, 2011 at 9:47 AM
 
The Lab Partner
The Lab Partner (Kindle Edition)
By Tameka Weller

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The Lab Partner (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 14, 2011 at 9:47 AM
 
The Lab Partner
The Lab Partner (Kindle Edition)
By Tameka Weller

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The Lab Partner (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 14, 2011 at 9:47 AM
 
The Lab Partner
The Lab Partner (Kindle Edition)
By Tameka Weller

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The Gamekeeper's Lady (Harlequin Historical) (Mass Market Paperback) newly tagged "sexy"
April 14, 2011 at 8:03 AM
 
The Gamekeeper's Lady (Harlequin Historical)
The Gamekeeper's Lady (Harlequin Historical) (Mass Market Paperback)
By Ann Lethbridge

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Connecticut, The True Wealth of Love (50 U.S. States Romance Novel Series) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:46 PM
 
Connecticut, The True Wealth of Love (50 U.S. States Romance Novel Series)
Connecticut, The True Wealth of Love (50 U.S. States Romance Novel Series) (Kindle Edition)
By F.D. Caldwell
   
   
Connecticut, The True Wealth of Love (50 U.S. States Romance Novel Series) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:46 PM
 
Connecticut, The True Wealth of Love (50 U.S. States Romance Novel Series)
Connecticut, The True Wealth of Love (50 U.S. States Romance Novel Series) (Kindle Edition)
By F.D. Caldwell
   
   
Colorado, Bitter Winters of Sweet Love (50 U.S. States Romance Novels Series) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:42 PM
 
Colorado, Bitter Winters of Sweet Love (50 U.S. States Romance Novels Series)
Colorado, Bitter Winters of Sweet Love (50 U.S. States Romance Novels Series) (Kindle Edition)
By F.D. Caldwell
   
   
Colorado, Bitter Winters of Sweet Love (50 U.S. States Romance Novels Series) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:42 PM
 
Colorado, Bitter Winters of Sweet Love (50 U.S. States Romance Novels Series)
Colorado, Bitter Winters of Sweet Love (50 U.S. States Romance Novels Series) (Kindle Edition)
By F.D. Caldwell
   
   
Colorado, Bitter Winters of Sweet Love (50 U.S. States Romance Novels Series) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:41 PM
 
Colorado, Bitter Winters of Sweet Love (50 U.S. States Romance Novels Series)
Colorado, Bitter Winters of Sweet Love (50 U.S. States Romance Novels Series) (Kindle Edition)
By F.D. Caldwell
   
   
California, Dreaming of Love (50 U.S. States Romance Novel Series) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:36 PM
 
California, Dreaming of Love (50 U.S. States Romance Novel Series)
California, Dreaming of Love (50 U.S. States Romance Novel Series) (Kindle Edition)
By F.D. Caldwell
   
   
California, Dreaming of Love (50 U.S. States Romance Novel Series) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:35 PM
 
California, Dreaming of Love (50 U.S. States Romance Novel Series)
California, Dreaming of Love (50 U.S. States Romance Novel Series) (Kindle Edition)
By F.D. Caldwell
   
   
California, Dreaming of Love (50 U.S. States Romance Novel Series) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:35 PM
 
California, Dreaming of Love (50 U.S. States Romance Novel Series)
California, Dreaming of Love (50 U.S. States Romance Novel Series) (Kindle Edition)
By F.D. Caldwell
   
   
Arkansas, A Wish For Love Comes True (50 U.S. States Romance Novels) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:27 PM
 
Arkansas, A Wish For Love Comes True (50 U.S. States Romance Novels)
Arkansas, A Wish For Love Comes True (50 U.S. States Romance Novels) (Kindle Edition)
By F. D. Caldwell
   
   
Arkansas, A Wish For Love Comes True (50 U.S. States Romance Novels) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:27 PM
 
Arkansas, A Wish For Love Comes True (50 U.S. States Romance Novels)
Arkansas, A Wish For Love Comes True (50 U.S. States Romance Novels) (Kindle Edition)
By F. D. Caldwell
   
   
Arizona, An Adventure of Love (U.S. 50 States Romance Novel Series) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:22 PM
 
Arizona, An Adventure of Love (U.S. 50 States Romance Novel Series)
Arizona, An Adventure of Love (U.S. 50 States Romance Novel Series) (Kindle Edition)
By F.D. Caldwell
   
   
Arizona, An Adventure of Love (U.S. 50 States Romance Novel Series) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:21 PM
 
Arizona, An Adventure of Love (U.S. 50 States Romance Novel Series)
Arizona, An Adventure of Love (U.S. 50 States Romance Novel Series) (Kindle Edition)
By F.D. Caldwell
   
   
Arizona, An Adventure of Love (U.S. 50 States Romance Novel Series) (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:21 PM
 
Arizona, An Adventure of Love (U.S. 50 States Romance Novel Series)
Arizona, An Adventure of Love (U.S. 50 States Romance Novel Series) (Kindle Edition)
By F.D. Caldwell
   
   
Alaska, Love Found Under the Stars (Paperback) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:19 PM
 
Alaska, Love Found Under the Stars
Alaska, Love Found Under the Stars (Paperback)
By F.D. Caldwell
   
   
Alaska, Love Found Under the Stars (Paperback) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:19 PM
 
Alaska, Love Found Under the Stars
Alaska, Love Found Under the Stars (Paperback)
By F.D. Caldwell
   
   
Alaska, Love Found Under the Stars (Paperback) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:19 PM
 
Alaska, Love Found Under the Stars
Alaska, Love Found Under the Stars (Paperback)
By F.D. Caldwell
   
   
Alaska, Love Found Under the Stars (Paperback) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:19 PM
 
Alaska, Love Found Under the Stars
Alaska, Love Found Under the Stars (Paperback)
By F.D. Caldwell
   
   
Alabama, A Haven For Love (Paperback) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:15 PM
 
Alabama, A Haven For Love
Alabama, A Haven For Love (Paperback)
By F.D. Caldwell
   
   
Alabama, A Haven For Love (Paperback) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 9:14 PM
 
Alabama, A Haven For Love
Alabama, A Haven For Love (Paperback)
By F.D. Caldwell
   
   
Cologne for Men by Givenchy, ( PI EAU DE TOILETTE SPRAY 3.4 oz. (Misc.) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 11:36 AM
 
Cologne for Men by Givenchy, ( PI EAU DE TOILETTE SPRAY 3.4 oz.
Cologne for Men by Givenchy, ( PI EAU DE TOILETTE SPRAY 3.4 oz. (Misc.)
By PI

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Cologne for Men by Givenchy, ( PI EAU DE TOILETTE SPRAY 3.4 oz. (Misc.) newly tagged "sexy"
April 13, 2011 at 11:35 AM
 
Cologne for Men by Givenchy, ( PI EAU DE TOILETTE SPRAY 3.4 oz.
Cologne for Men by Givenchy, ( PI EAU DE TOILETTE SPRAY 3.4 oz. (Misc.)
By PI

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MAXSTUDIO RUFFLED SWEATER DRESS (Apparel) newly tagged "sexy"
April 12, 2011 at 5:33 PM
 
MAXSTUDIO RUFFLED SWEATER DRESS
MAXSTUDIO RUFFLED SWEATER DRESS (Apparel)
By MaxStudio

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First tagged "sexy" by des1157
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MAXSTUDIO RUFFLED SWEATER DRESS (Apparel) newly tagged "sexy"
April 12, 2011 at 5:33 PM
 
MAXSTUDIO RUFFLED SWEATER DRESS
MAXSTUDIO RUFFLED SWEATER DRESS (Apparel)
By MaxStudio

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First tagged "sexy" by des1157
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Wolf Magick (Kindle Edition) newly tagged "sexy"
April 12, 2011 at 3:27 AM
 
Wolf Magick
Wolf Magick (Kindle Edition)
By Cynthia Cooke

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